श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  1.9.143 
पुनश्च पद्मादुत्पन्ना आदित्योऽभूद्यदा हरि:।
यदा तु भार्गवो रामस्तदाभूद्धरणी त्वियम्॥ १४३॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीहरि आदित्य हुए, तब वह कमल से पुनः उत्पन्न हुई [और पद्मा कहलाई] और जब वे परशुराम हुए, तब वह पृथ्वी हुई ॥143॥
 
When Shri Hari became Aditya, she was born again from the lotus [and was called Padma]. And when he became Parasurama, she became the Earth.॥ 143॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)