श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  1.9.138 
श्रीरुवाच
त्रैलोक्यं त्रिदशश्रेष्ठ न सन्त्यक्ष्यामि वासव।
दत्तो वरो मया यस्ते स्तोत्राराधनतुष्टया॥ १३८॥
 
 
अनुवाद
श्री लक्ष्मी ने कहा, "हे देवश्रेष्ठ इन्द्र! मैं इन तीनों लोकों को कभी नहीं छोडूंगी। तुम्हारी प्रार्थना से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें यह वरदान देती हूं।" 138.
 
Sri Lakshmi said, "Oh Indra, the best of gods! I will never leave this three worlds. Pleased with your prayer, I grant you this boon." 138.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)