श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  1.9.131 
स श्लाघ्य: स गुणी धन्य: स कुलीन: स बुद्धिमान्।
स शूर: स च विक्रान्तो यस्त्वया देवि वीक्षित:॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
हे देवि! जिस पर आपकी कृपा है, वह स्तुतियोग्य, गुणवान, धन्य, कुलीन, बुद्धिमान तथा शूरवीर एवं पराक्रमी है॥131॥
 
O Goddess! He who has your blessings is praiseworthy, virtuous, blessed, noble and intelligent, and valiant and valiant.॥ 131॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)