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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 130
श्लोक
1.9.130
त्वया विलोकिता: सद्य: शीलाद्यैरखिलैर्गुणै:।
कुलैश्वर्यैश्च युज्यन्ते पुरुषा निर्गुणा अपि॥ १३०॥
अनुवाद
और आपकी कृपादृष्टिसे पुण्यात्मा पुरुष भी शीघ्र ही शील, कुलीनता और ऐश्वर्य आदि समस्त गुणोंसे युक्त हो जाते हैं ॥130॥
And with your kind glance, even the virtuous men soon become endowed with all the virtues like modesty, nobility and opulence etc. 130॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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