श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  1.9.129 
सत्त्वेन सत्यशौचाभ्यां तथा शीलादिभिर्गुणै:।
त्यज्यन्ते ते नरा: सद्य: सन्त्यक्ता ये त्वयामले॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
हे अमला! जिन लोगों को तू त्याग देता है, उनके सत्व, सत्य, शुचिता और सदाचार आदि गुण भी शीघ्र ही त्याग देते हैं ॥129॥
 
O Amala! The people whom you abandon, their qualities like Sattva (mental strength), truth, cleanliness and morality also soon leave them. ॥129॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)