मान: कोशं तथा गोष्ठं मा गृहं मा परिच्छदम्।
मा शरीरं कलत्रं च त्यजेथा: सर्वपावनि॥ १२७॥
अनुवाद
हे सर्वपवित्र मातेश्वरी! आप हमारे कोष, गोष्ठ, घर, भोग, शरीर और स्त्री आदि का कभी त्याग न करें अर्थात् इनसे परिपूर्ण रहें ॥127॥
O all-holy Mateshwari! You should never abandon our Kosha (treasury), Goshtha (cattle shed), house, enjoyment, body and woman etc. i.e. be full of these. 127॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥