श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  1.9.125 
शरीरारोग्यमैश्वर्यमरिपक्षक्षय: सुखम्।
देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
हे देवी! जिन पर आपकी कृपा हो जाती है, उनके लिए शारीरिक स्वास्थ्य, समृद्धि, शत्रुनाश और सुख जैसी कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं है॥125॥
 
O Goddess! Nothing is rare for those who are blessed with your blessings, such as physical health, prosperity, destruction of enemies and happiness. ॥ 125॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)