श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  1.9.121 
आन्वीक्षिकी त्रयीवार्त्ता दण्डनीतिस्त्वमेव च।
सौम्यासौम्यैर्जगद्‍रूपैस्त्वयैतद्देवि पूरितम्॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
हे देवि! आप आन्वीक्षिकी (तर्क), वेदत्रयी, वार्ता (शिल्प, वाणिज्य) और दण्डनीति (राजनीति) भी हैं। आपने अपने शान्त और रौद्र रूपों से इस सम्पूर्ण जगत को व्याप्त कर रखा है। 121॥
 
O Goddess! You are also Anvikshiki (logic), Vedatrayee, Varta (crafts, commerce) and Dandneeti (politics). You have pervaded this entire world with your peaceful and violent forms. 121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)