श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.9.12 
दुर्वासा उवाच
ऐश्वर्यमददुष्टात्मन्नतिस्तब्धोऽसि वासव।
श्रियो धाम स्रजं यस्त्वं मद्दत्तां नाभिनन्दसि॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
दुर्वासा बोले, "हे इंद्र! ऐश्वर्य के नशे से दूषित मन वाले तुम बड़े धृष्ट हो। तुमने मेरे द्वारा दी गई समस्त सौन्दर्य की माला का जरा भी आदर नहीं किया।"
 
Durvasa said, "Oh Indra, whose mind is polluted by the intoxication of opulence, you are very impudent. You did not respect the garland of all the beauty given by me at all."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)