श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  1.9.117 
इन्द्र उवाच
नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्जसम्भवाम्।
श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्ष:स्थलस्थिताम्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र बोले - मैं सम्पूर्ण लोकों की माता, खिले हुए कमल के समान नेत्रों वाली, भगवान विष्णु के वक्षस्थल में विराजमान श्री लक्ष्मी देवी को नमस्कार करता हूँ ॥117॥
 
Indra said - I salute Sri Lakshmi Devi, the mother of all the worlds, with eyes like a blossomed lotus, who is seated in the chest of Lord Vishnu. 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)