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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 110
श्लोक
1.9.110
तत: पपु: सुरगणा: शक्राद्यास्तत्तदाऽ मृतम्।
उद्यतायुधनिस्त्रिंशा दैत्यास्तांश्च समभ्ययु:॥ ११० ॥
अनुवाद
तब इन्द्र आदि देवताओं ने अमृत पी लिया; इससे क्रोधित होकर दैत्यों ने तलवार आदि अत्यन्त तीक्ष्ण शस्त्रों से सुसज्जित होकर उन पर आक्रमण कर दिया।
Then the gods like Indra drank the nectar; due to this the demons, armed with very sharp weapons like swords etc., attacked them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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