श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  1.9.108 
ततस्ते जगृहुर्दैत्या धन्वन्तरिकरस्थितम्।
कमण्डलुं महावीर्या यत्रास्तेऽमृतमुत्तमम्॥ १०८ ॥
 
 
अनुवाद
तब उन महाबली दैत्यों ने श्री धन्वन्तरिजी के हाथों से उत्तम अमृत से भरा हुआ कमण्डलु छीन लिया ॥108॥
 
Then those mighty demons snatched the Kamandalu which was filled with the most excellent nectar from the hands of Shri Dhanvantriji. 108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)