श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  1.9.106 
तया विलोकिता देवा हरिवक्ष:स्थलस्थया।
लक्ष्म्या मैत्रेय सहसा परां निर्वृतिमागता:॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! श्रीहरि के वक्षस्थल में श्रीलक्ष्मीजी को विराजमान देखकर देवताओं को अचानक अत्यंत प्रसन्नता हुई ॥106॥
 
O Maitreya! The gods suddenly felt extremely happy after seeing Shri Lakshmiji seated in the chest of Shri Hari. 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)