श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  1.9.104 
क्षीरोदो रूपधृक्तस्यै मालामम्लानपङ्कजाम्।
ददौ विभूषणान्यङ्गे विश्वकर्मा चकार ह॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
क्षीर सागर ने मूर्तिरूप धारण करके उन्हें खिले हुए कमल पुष्पों की माला दी और विश्वकर्मा ने उनके शरीर को नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित किया ॥104॥
 
Ksheer Sagar took the form of an idol and gave him a garland of blossomed lotus flowers and Vishwakarma decorated his body with various ornaments. 104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)