श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.9.10 
मदान्धकारिताक्षोऽसौ गन्धाकृष्टेन वारण:।
करेणाघ्राय चिक्षेप तां स्रजं धरणीतले॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
उसकी गंध से आकर्षित होकर मदमस्त हाथी ने भी उसे अपनी सूँड़ से सूँघा और धरती पर फेंक दिया।
 
Attracted by its scent, the intoxicated elephant too sniffed it with its trunk and threw it on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)