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vishnu 1.8.33: भगवान नारायण लोभ हैं और देवी लक्ष्मी कामना हैं। हे मैत्रेय, प्रेम और वासना भी देवी लक्ष्मी और भगवान गोविंद के ही स्वरूप हैं। ॥33॥   |   vishnu अध्याय 1.8: रौद्र-सृष्टि और भगवान‍् तथा लक्ष्मीजीकी सर्वव्यापकताका वर्णन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.8.33 
तृष्णा लक्ष्मीर्जगन्नाथो लोभो नारायण: पर:।
रती रागश्च मैत्रेय लक्ष्मीर्गोविन्द एव च॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान नारायण लोभ हैं और देवी लक्ष्मी कामना हैं। हे मैत्रेय, प्रेम और वासना भी देवी लक्ष्मी और भगवान गोविंद के ही स्वरूप हैं। ॥33॥
 
Lord Narayana, the Supreme Lord, is greed and Goddess Lakshmi is desire. O Maitreya, love and passion are also the manifestations of Goddess Lakshmi and Lord Govind. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)