श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 8: रौद्र-सृष्टि और भगवान‍् तथा लक्ष्मीजीकी सर्वव्यापकताका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.8.30 
ज्योत्स्ना लक्ष्मी: प्रदीपोऽसौ सर्व: सर्वेश्वरो हरि:।
लताभूता जगन्माता श्रीविष्णुर्द्रुमसंज्ञित:॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
सर्वव्यापी परमेश्वर श्री हरि दीपक हैं और श्री लक्ष्मी प्रकाश हैं। श्री विष्णु वृक्ष रूप हैं और जगतजननी श्री लक्ष्मी लता हैं। 30.
 
Sri Hari, the all-pervading Supreme Being, is the lamp and Sri Lakshmi is the light. Sri Vishnu is in the form of a tree and the mother of the universe, Sri Lakshmi, is the creeper. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)