Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.8.25: भगवान श्रीधर चन्द्रमा हैं और श्रीलक्ष्मी उनकी अक्षय प्रभा हैं, हरि सर्वव्यापी वायु हैं और लक्ष्मी जगच्छेष्टा (संसार की गति) और धृति (आधार) हैं। ॥25॥ | vishnu अध्याय 1.8: रौद्र-सृष्टि और भगवान् तथा लक्ष्मीजीकी सर्वव्यापकताका वर्णन । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शशाङ्क: श्रीधर: कान्ति: श्रीस्तथैवानपायिनी।
धृतिर्लक्ष्मीर्जगच्चेष्टा वायु: सर्वत्रगो हरि:॥ २५ ॥
अनुवाद
भगवान श्रीधर चन्द्रमा हैं और श्रीलक्ष्मी उनकी अक्षय प्रभा हैं, हरि सर्वव्यापी वायु हैं और लक्ष्मी जगच्छेष्टा (संसार की गति) और धृति (आधार) हैं। ॥25॥
Lord Shridhar is the moon and Sri Lakshmi is its inexhaustible radiance, Hari is the omnipresent wind and Lakshmi is the Jagacchheshta (movement of the world) and Dhriti (support). ॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥