vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन
»
श्लोक 56
श्लोक
1.5.56
एकविंशमथर्वाणमाप्तोर्यामाणमेव च।
अनुष्टुभं च वैराजमुत्तरादसृजन्मुखात्॥ ५६॥
अनुवाद
तथा उत्तर-मुख से उन्होंने एकविंशतिस्तोम, अथर्ववेद, आप्टोर्यमान, अनुष्टुपण्ड तथा वैराज की रचना की। 56॥
And from Uttar-Mukh he created Ekavinshatistom, Atharvaveda, Aptoryaman, Anushtupand and Vairaj. 56॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd