श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.5.46 
गायतोऽङ्गात्समुत्पन्ना गन्धर्वास्तस्य तत्क्षणात्।
पिबन्तो जज्ञिरे वाचं गन्धर्वास्तेन ते द्विज॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
तब गाते हुए उसके शरीर से तुरन्त ही गन्धर्व उत्पन्न हुए । हे द्विज ! वे शब्द करते हुए अर्थात् बोलते हुए उत्पन्न हुए थे, इसलिए वे 'गन्धर्व' कहलाए ॥46॥
 
Then while singing, Gandharvas immediately emerged from his body. Hey Dwija! They were born while uttering words, that is, speaking, hence they were called 'Gandharva'. 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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