श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.5.31 
युक्तात्मनस्तमोमात्रा ह्युद्रिक्ताऽभूत्प्रजापते:।
सिसृक्षोर्जघनात्पूर्वमसुरा जज्ञिरे तत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जब प्रजापति का मन सृष्टि की रचना करने की इच्छा में एकाग्र हुआ, तब तमोगुण की वृद्धि हुई। अतः सर्वप्रथम उनकी जंघा से दैत्य उत्पन्न हुए॥31॥
 
When Prajapati's mind became focused on the desire to create the universe, the Tamoguna (the element of darkness) increased. Hence, the demons were first born from his thigh.॥ 31॥
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