श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.5.28 
श्रीपराशर उवाच
कर्मभिर्भाविता: पूर्वै: कुशलाकुशलैस्तु ता:।
ख्यात्या तया ह्यनिर्मुक्ता: संहारे ह्युपसंहृता:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले, 'हे मैत्रेय! सभी मनुष्य अपने पूर्वजन्म के शुभ-अशुभ कर्मों से प्रभावित होते हैं; अतः प्रलयकाल में जब वे सब नष्ट हो जाते हैं, तब भी वे अपने संस्कारों से मुक्त नहीं होते।
 
Shri Parashara said, 'O Maitreya! All human beings are affected by their past good and bad deeds; therefore, even when they all get destroyed during the time of Pralaya (destruction), they are not free from their impressions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)