श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.5.24 
अष्टमोऽनुग्रह: सर्ग: सात्त्विकस्तामसश्च स:।
पञ्चैते वैकृता: सर्गा: प्राकृतास्तु त्रय: स्मृता:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आठवाँ अनुग्रह सर्ग है। यह सात्त्विक और तामसिक है। ये पाँच वैकृत (विकृत) सर्ग हैं और पहले तीन 'प्राकृत सर्ग' कहलाते हैं।॥24॥
 
The eighth is Anugraha Sarga. It is Sattvik and Tamasik. These five are Vaikrita (deformed) Sargas and the first three are called 'Prakrit Sargas'.॥24॥
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