| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन » श्लोक 18 |
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| | | | श्लोक 1.5.18  | तस्मात्ते दु:खबहुला भूयोभूयश्च कारिण:।
प्रकाशा बहिरन्तश्च मनुष्या: साधकास्तु ते॥ १८ ॥ | | | | | | अनुवाद | | इसलिये वे दुःखों से युक्त, अत्यन्त क्रियाशील, बाह्य तथा आन्तरिक ज्ञान से युक्त तथा साधक हैं। इस स्वर्ग के प्राणी मनुष्य हैं ॥18॥ | | | | That is why they are full of sorrows, very active and full of external and internal knowledge and are seekers. The creatures of this heaven are humans. 18॥ | | ✨ ai-generated | | |
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