| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन » श्लोक 17 |
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| | | | श्लोक 1.5.17  | यस्मादर्वाग्व्यवर्त्तन्त ततोऽर्वाक्स्रोतसस्तु ते।
ते च प्रकाशबहुलास्तमोद्रिक्ता रजोऽधिका:॥ १७॥ | | | | | | अनुवाद | | इस सर्ग के प्राणी नीचे (पृथ्वी पर) रहते हैं, इसलिए इन्हें 'अर्वाक्षरोता' कहते हैं। इनमें सत्व, रज और तम तीनों की प्रचुरता होती है ॥17॥ | | | | The creatures of this Sarga live below (on the earth), hence they are called 'Arvaksrota'. There is abundance of all three Sattva, Raja and Tama in them. 17॥ | | ✨ ai-generated | | |
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