श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.4.48 
प्राक्सर्गदग्धानखिला न‍् पर्वता न‍् पृथिवीतले।
अमोघेन प्रभावेण ससर्जामोघवाञ्छित:॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् सत्यसंकल्प ने अपने अमोघ प्रभाव से पूर्व कल्प के अन्त में जलकर नष्ट हो चुके समस्त पर्वतों को पृथ्वी पर यथास्थान उत्पन्न कर दिया ॥48॥
 
With his unfailing influence, Lord Satyasankalp created all the mountains that were burnt at the end of the previous Kalpa in their place on the earth's surface. 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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