श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.4.45 
श्रीपराशर उवाच
एवं संस्तूयमानस्तु परमात्मा महीधर:।
उज्जहार क्षितिं क्षिप्रं न्यस्तवांश्च महाम्भसि॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले: इस प्रकार स्तुति किये जाने पर पृथ्वी को धारण करने वाले परम पुरुष वराह ने उसे तुरन्त उठाकर विशाल जल के ऊपर रख दिया।
 
Sri Parashara said: On being praised in this manner, Varaha, the Supreme Being who holds the Earth, quickly lifted it and placed it above the vast water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)