श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.4.39 
यदेतद् दृश्यते मूर्त्तमेतज्ज्ञानात्मनस्तव।
भ्रान्तिज्ञानेन पश्यन्ति जग द्‍रू पमयोगिन:॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
इस स्थूल जगत् में जो कुछ भी दिखाई देता है, वह आपका ज्ञानस्वरूप है। अजितेन्द्रिय लोग भ्रमवश उसे जगत् का ही रूप मानते हैं ॥39॥
 
Whatever is visible in this tangible world is your form of knowledge. Ajitendriya people mistakenly see it as the form of the world. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)