श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.22.88 
इत्येष तेंऽश: प्रथम: पुराणस्यास्य वै द्विज।
यथावत्कथितो यस्मिञ्छ्रुते पापै: प्रमुच्यते॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! इस प्रकार मैंने तुमसे इस पुराण का प्रथम भाग सम्पूर्ण रूप से कहा है। इसे सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है ॥ 88॥
 
O Dwija! Thus I have narrated to you the first part of this Purana in its entirety. By listening to it a man becomes free from all sins. ॥ 88॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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