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श्लोक 1.22.86  |
यानि मूर्त्तान्यमूर्त्तानि यान्यत्रान्यत्र वा क्वचित्।
सन्ति वै वस्तुजातानि तानि सर्वाणि तद्वपु:॥ ८६॥ |
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| अनुवाद |
| इस संसार में या अन्यत्र जितने भी मूर्त और अमूर्त पदार्थ हैं, वे सब उसी के शरीर हैं ॥86॥ |
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| All the tangible and intangible objects in this world or anywhere else are His body. ॥ 86॥ |
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