श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  1.22.86 
यानि मूर्त्तान्यमूर्त्तानि यान्यत्रान्यत्र वा क्वचित्।
सन्ति वै वस्तुजातानि तानि सर्वाणि तद्वपु:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में या अन्यत्र जितने भी मूर्त और अमूर्त पदार्थ हैं, वे सब उसी के शरीर हैं ॥86॥
 
All the tangible and intangible objects in this world or anywhere else are His body. ॥ 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)