श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 83-85
 
 
श्लोक  1.22.83-85 
ऋचो यजूंषि सामानि तथैवाथर्वणानि वै।
इतिहासोपवेदाश्च वेदान्तेषु तथोक्तय:॥ ८३॥
वेदाङ्गानि समस्तानि मन्वादिगदितानि च।
शास्त्राण्यशेषाण्याख्यानान्यनुवाकाश्च ये क्वचित्॥ ८४॥
काव्यालापाश्च ये केचिद‍्गीतकान्यखिलानि च।
शब्दमूर्तिधरस्यैतद्वपुर्विष्णोर्महात्मन:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
ऋक्, यजुः, साम और अथर्ववेद, इतिहास (महाभारत आदि), उपवेद (आयुर्वेद आदि), वेदांत वाक्य, सभी वेदांग, मनु आदि सभी तथाकथित धार्मिक ग्रंथ, पुराण आदि सकल शास्त्र, आख्यान, अनुवाक (कल्प सूत्र) और सभी काव्य चर्चा और राग-रागिनी आदि, वह सब शब्द रूप में अवतरित भगवान विष्णु का शरीर है। 83-85॥
 
Rik, Yajuh, Sama and Atharvaveda, Itihasa (Mahabharata etc.), Upveda (Ayurveda etc.), Vedanta Vakya, all Vedangas, all the so-called religious scriptures like Manu etc., Puranas etc. Sakal Shastras, narratives, Anuvak (Kalpa Sutra) and all poetic discussions and Raga-Ragini etc., all that is the body of Lord Vishnu incarnate in words. 83-85॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas