vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
»
श्लोक 82
श्लोक
1.22.82
देवमानुषपश्वादिस्वरूपैर्बहुभि: स्थित:।
तत: सर्वेश्वरोऽनन्तो भूतमूर्तिरमूर्त्तिमान्॥ ८२॥
अनुवाद
निराकार और सनातन भगवान श्री अनन्त देवता, मनुष्य और पशु आदि अनेक रूपों में विद्यमान हैं ॥82॥
The formless and eternal Lord Shri Anant is present in various forms like gods, humans and animals etc. 82॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×