श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.22.82 
देवमानुषपश्वादिस्वरूपैर्बहुभि: स्थित:।
तत: सर्वेश्वरोऽनन्तो भूतमूर्तिरमूर्त्तिमान्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
निराकार और सनातन भगवान श्री अनन्त देवता, मनुष्य और पशु आदि अनेक रूपों में विद्यमान हैं ॥82॥
 
The formless and eternal Lord Shri Anant is present in various forms like gods, humans and animals etc. 82॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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