श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  1.22.81 
लोकात्ममूर्त्ति: सर्वेषां पूर्वेषामपि पूर्वज:।
आधार: सर्वविद्यानां स्वयमेव हरि: स्थित:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
समस्त पितरों के भी पूर्वज और समस्त ज्ञान के आधार श्री हरि स्वयं ही ब्रह्माण्डरूप में स्थित हैं ॥81॥
 
Sri Hari, the ancestor of all ancestors and the basis of all knowledge, is himself situated in the form of the universe. ॥ 81॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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