| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन » श्लोक 79 |
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| | | | श्लोक 1.22.79  | कलाकाष्ठानिमेषादिदिनर्त्वयनहायनै:।
कालस्वरूपो भगवानपापो हरिरव्यय:॥ ७९॥ | | | | | | अनुवाद | | काल, काष्ठा, निमेष, दिन, ऋतु, अयन और वर्ष के रूप में पापरहित अव्यय श्री हरि ही काल के रूप में विद्यमान रहते हैं ॥79॥ | | | | In the form of Kala, Kashtha, Nimesh, day, season, ayana and year, the sinless Avaya Shri Hari is present in the form of time. 79॥ | | ✨ ai-generated | | |
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