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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 78
श्लोक
1.22.78
याविद्या या तथाविद्यायत्सद्यच्चासदव्ययम्।
तत्सर्वं सर्वभूतेशे मैत्रेय मधुसूदने॥ ७८॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! जो कुछ भी ज्ञान-अज्ञान, सत्-असत् और निराकार है, वह सब परमेश्वर श्रीमधुसूदन में ही स्थित है॥78॥
Whatever is knowledge-ignorance, true-false and formless, O Maitreya! All that Supreme God is situated in Shrimadhusudan only. 78॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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