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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 77
श्लोक
1.22.77
सविकारं प्रधानं च पुमांसमखिलं जगत्।
बिभर्त्ति पुण्डरीकाक्षस्तदेवं परमेश्वर:॥ ७७॥
अनुवाद
इस प्रकार कमलनेत्र परमेश्वर पुण्यात्मा मनुष्य और सम्पूर्ण जगत् का पालन करते हैं ॥77॥
In this manner the lotus-eyed Supreme Lord sustains the virtuous [unembraceable] human being and the entire universe. ॥77॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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