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श्लोक 1.22.77  |
सविकारं प्रधानं च पुमांसमखिलं जगत्।
बिभर्त्ति पुण्डरीकाक्षस्तदेवं परमेश्वर:॥ ७७॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार कमलनेत्र परमेश्वर पुण्यात्मा मनुष्य और सम्पूर्ण जगत् का पालन करते हैं ॥77॥ |
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| In this manner the lotus-eyed Supreme Lord sustains the virtuous [unembraceable] human being and the entire universe. ॥77॥ |
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