श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.22.75 
इत्थं पुमान‍्प्रधानं च बुद्धॺहङ्कारमेव च।
भूतानि च हृषीकेशे मन: सर्वेन्द्रियाणि च।
विद्याविद्ये च मैत्रेय सर्वमेतत्समाश्रितम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार मनुष्य, सिर, बुद्धि, अहंकार, पंचभूत, मन, इन्द्रियाँ तथा ज्ञान और अज्ञान, ये सभी श्री हृषीकेश के अधीन हैं।
 
O Maitreya! In this manner the human being, the head, the intellect, the ego, the five elements, the mind, the senses, as well as knowledge and ignorance, all are dependent on Shri Hrishikesha. 75.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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