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श्लोक 1.22.74  |
बिभर्त्ति यच्चासिरत्नमच्युतोऽत्यन्तनिर्मलम्।
विद्यामयं तु तज्ज्ञानमविद्याकोशसंस्थितम्॥ ७४॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान् अच्युत के हाथ में जो शुद्ध तलवार है, वह वही ज्ञान है जो अज्ञानरूपी म्यान से ढका हुआ है ॥ 74॥ |
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| The pure sword which Lord Achyuta holds is the very knowledge which is covered by the sheath of ignorance. ॥ 74॥ |
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