श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.22.74 
बिभर्त्ति यच्चासिरत्नमच्युतोऽत्यन्तनिर्मलम्।
विद्यामयं तु तज्ज्ञानमविद्याकोशसंस्थितम्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
भगवान् अच्युत के हाथ में जो शुद्ध तलवार है, वह वही ज्ञान है जो अज्ञानरूपी म्यान से ढका हुआ है ॥ 74॥
 
The pure sword which Lord Achyuta holds is the very knowledge which is covered by the sheath of ignorance. ॥ 74॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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