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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 73
श्लोक
1.22.73
यानीन्द्रियाण्यशेषाणि बुद्धिकर्मात्मकानि वै।
शररूपाण्यशेषाणि तानि धत्ते जनार्दन:॥ ७३॥
अनुवाद
ज्ञान और कर्म की समस्त इन्द्रियाँ भगवान जनार्दन ने बाणों के रूप में धारण कर रखी हैं। 73.
All the senses which are of knowledge and action are held by Lord Janardan in the form of arrows. 73.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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