श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.22.72 
पञ्चरूपा तु या माला वैजयन्ती गदाभृत:।
सा भूतहेतुसङ्घाता भूतमाला च वै द्विज॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! भगवान गदाधर की पंचरूपी वैजयन्ती माला [मुक्ता, माणिक्य, पन्ना, इन्द्रनील और हीरा] पाँच तत्त्वों और पाँच तत्त्वों का सम्मिश्रण है ॥72॥
 
Hey Dwija! The five-form Vaijayanti rosary [Mukta, Ruby, Emerald, Indranil and Diamond] of Lord Gadadhar is a combination of the five elements and the five elements. 72॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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