| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन » श्लोक 67 |
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| | | | श्लोक 1.22.67  | श्रीपराशर उवाच
नमस्कृत्याप्रमेयाय विष्णवे प्रभविष्णवे।
कथयामि यथाख्यातं वसिष्ठेन ममाभवत्॥ ६७॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री पराशर बोले, "हे ऋषिवर! जगत के रक्षक, उन अथाह भगवान विष्णु को नमस्कार करो। अब मैं आपको वशिष्ठ जी ने जो कहा था, वह बताता हूँ।" | | | | Sri Parashara said, 'O sage! Salute the immeasurable Lord Vishnu, who is the saviour of the universe. Now I will narrate to you what Vasishtha had told me.' | | ✨ ai-generated | | |
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