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श्लोक 1.22.66  |
श्रीमैत्रेय उवाच
भूषणास्त्रस्वरूपस्थं यच्चैतदखिलं जगत्।
बिभर्त्ति भगवान्विष्णुस्तन्ममाख्यातुमर्हसि॥ ६६॥ |
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| अनुवाद |
| श्री मैत्रेयजी बोले - भगवान विष्णु इस संसार को आभूषण और शस्त्र के रूप में किस प्रकार धारण करते हैं, यह मुझे बताइये। |
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| Sri Maitreya said - Tell me how Lord Vishnu wears this world as an ornament and a weapon. 66. |
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