श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.22.65 
क्षराक्षरमयो विष्णुर्बिभर्त्त्यखिलमीश्वर:।
पुरुषाव्याकृतमयं भूषणास्त्रस्वरूपवत्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
क्षराक्षरमय भगवान विष्णु ही इस सम्पूर्ण पुरुष और स्त्री प्रकृति से युक्त जगत् को अपने आभूषणों और आयुधों के रूप में धारण करते हैं ॥ 65॥
 
Only the Ksharaksharamay (action-cause) God Vishnu wears this entire universe composed of male and female nature as His ornaments and weapons. ॥ 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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