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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 64
श्लोक
1.22.64
तत्र सर्वमिदं प्रोतमोतं चैवाखिलं जगत्।
ततो जगज्जगत्तस्मिन्स जगच्चाखिलं मुने॥ ६४॥
अनुवाद
हे मुनि! सम्पूर्ण जगत् उन्हीं से व्याप्त है, उन्हीं से उत्पन्न है, उन्हीं में स्थित है और वे ही सम्पूर्ण जगत् हैं ॥64॥
O sage! The whole universe is permeated by Him, it is born from Him, it exists in Him and He Himself is the whole universe. ॥ 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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