श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.22.61 
सर्वशक्तिमयो विष्णु: स्वरूपं ब्रह्मण: परम्।
मूर्त्तं यद्योगिभि: पूर्वं योगारम्भेषु चिन्त्यते॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
सर्वशक्तिमान विष्णु ही ब्रह्मा के परम रूप और स्वरूप हैं, जिनका योगीजन योगाभ्यास आरम्भ करने से पूर्व चिन्तन करते हैं ॥61॥
 
Almighty Vishnu is the supreme form and embodiment of Brahma whom yogis think about before beginning yoga. 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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