| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन » श्लोक 60 |
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| | | | श्लोक 1.22.60  | तदेतदक्षरं नित्यं जगन्मुनिवराखिलम्।
आविर्भावतिरोभावजन्मनाशविकल्पवत्॥ ६०॥ | | | | | | अनुवाद | | अतः हे मुनिवर! आविर्भाव (उत्पन्न होना), तिरोभाव (छिप जाना), जन्म और नाश इन विकल्पों से युक्त यह सम्पूर्ण जगत् वास्तव में अनादि और सनातन है ॥60॥ | | | | Therefore, O Munivar! This entire universe, which is endowed with the options of appearance (arising), disappearance (hiding), birth and destruction, is in reality eternal and everlasting. ॥ 60॥ | | ✨ ai-generated | | |
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