श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.22.57 
तत्राप्यासन्नदूरत्वाद‍्बहुत्वस्वल्पतामय:।
ज्योत्स्नाभेदोऽस्ति तच्छक्तेस्तद्वन्मैत्रेय विद्यते॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! जिस प्रकार अग्नि का प्रकाश समीपता या दूरी के अनुसार परिमाण और मात्रा में बदलता रहता है, उसी प्रकार ब्रह्म की शक्ति में भी भिन्नता होती है ॥57॥
 
O Maitreya! Just as the light of a fire varies in quantity and quantity depending on its proximity or distance, similarly, there is a variation in the energy of Brahman. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)