श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.22.56 
अक्षरं तत्परं ब्रह्म क्षरं सर्वमिदं जगत्।
एकदेशस्थितस्याग्नेर्ज्योत्स्ना विस्तारिणी यथा।
परस्य ब्रह्मण: शक्तिस्तथेदमखिलं जगत्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
अक्षर ही परब्रह्म है और क्षर ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड है। जिस प्रकार एकाग्र अग्नि का प्रकाश सर्वत्र फैल जाता है, उसी प्रकार यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड परब्रह्म की शक्ति है। 56.
 
Akshar is the Supreme Brahman and Kshar is the entire universe. Just as the light of a single-pointed fire spreads everywhere, similarly this entire universe is the energy of the Supreme Brahman. 56.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas