श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  1.22.55 
द्वे रूपे ब्रह्मणस्तस्य मूर्त्तं चामूर्तमेव च।
क्षराक्षरस्वरूपे ते सर्वभूतेष्ववस्थिते॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उस ब्रह्म के मूर्त और अमूर्त दो रूप हैं, जो नाशवान और अपरिवर्तनशील रूप में समस्त प्राणियों में विद्यमान हैं ॥ 55॥
 
That Brahma has two forms, tangible and intangible, which are present in all beings in the form of perishable and immutable. ॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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