श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.22.53 
एवंप्रकारममलं नित्यं व्यापकमक्षयम्।
समस्तहेयरहितं विष्ण्वाख्यं परमं पदम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार का वह शुद्ध, सनातन, सर्वव्यापक, अक्षय और समस्त निकृष्ट गुणों से रहित भगवान विष्णु नामक परब्रह्म हैं ॥53॥
 
Of this type, that pure, eternal, all-pervasive, inexhaustible and free from all inferior qualities is the Supreme Being named Vishnu. 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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